भूकंप तब आता है जब पृथ्वी की चट्टानों में जमा तनाव अचानक खिसकाव के साथ मुक्त होता है और ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में फैलती है। अधिकतर भूकंप विवर्तनिक प्लेटों की गति और भ्रंशों पर खिसकाव से जुड़े होते हैं। झटकों के दौरान भवन के अंदर हों तो नीचे झुकें, सिर और गर्दन ढकें तथा पास की मजबूत मेज का सहारा पकड़कर रुकें।

भूकंप क्यों आता है, यह जानने जितना जरूरी है सही समय पर सही व्यवहार करना। हिलती इमारत से भागना, सीढ़ियों पर भीड़ बनाना या शीशे के पास खड़े होना चोट का जोखिम बढ़ा सकता है। तैयारी पहले करें और घटना के बाद आधिकारिक सूचना का उपयोग करें। किसी वायरल संदेश को निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

भूकंप क्यों आता है समझाने वाला भ्रंश, चट्टानों के खिसकाव और भूकंपीय तरंगों का चित्र।
भ्रंश पर अचानक खिसकाव से मुक्त ऊर्जा जमीन को हिला सकती है।

भूकंप क्यों आता है: प्लेटें और भ्रंश समझें

पृथ्वी की बाहरी कठोर परत बड़े और छोटे खंडों में बँटी है, जिन्हें विवर्तनिक प्लेटें कहते हैं। ये लगातार धीरे-धीरे चलती रहती हैं। कहीं प्लेटें पास आती हैं, कहीं दूर जाती हैं और कहीं एक-दूसरे के बगल से गुजरती हैं। इन गतियों से चट्टानों में तनाव बन सकता है।

भ्रंश चट्टानों में ऐसी टूटन है जिसके दोनों ओर खिसकाव हो सकता है। घर्षण कुछ समय तक खिसकाव रोक सकता है, लेकिन तनाव बढ़ने पर अचानक गति होती है। मुक्त ऊर्जा आसपास की जमीन को हिलाती है। यह समझना जरूरी है कि सभी भूकंप केवल प्लेटों की स्पष्ट सीमा पर नहीं आते।

भूकंप के कारण समझने में प्लेटों की गति प्रमुख आधार है। ज्वालामुखीय गतिविधि और कुछ मानवीय गतिविधियाँ भी भूकंपीय घटनाओं से जुड़ सकती हैं। फिर भी किसी खास घटना का कारण केवल अनुमान से तय नहीं करना चाहिए। उसके स्थान, गहराई और भूगर्भीय संदर्भ की वैज्ञानिक जाँच आवश्यक है।

उद्गम केंद्र और अधिकेंद्र में क्या अंतर है?

पृथ्वी के भीतर जहाँ टूटन शुरू होती है, उसे उद्गम केंद्र कहते हैं। उसके ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित बिंदु अधिकेंद्र कहलाता है। दोनों अलग हैं। समाचार में किसी शहर से दूरी पढ़ते समय यह देखें कि सूचना अधिकेंद्र की है या प्रभावित क्षेत्र की।

झटकों का प्रभाव केवल अधिकेंद्र से दूरी पर निर्भर नहीं करता। भूकंप का परिमाण, गहराई, तरंगों का रास्ता, स्थानीय मिट्टी और भवन की बनावट भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए दो स्थानों पर एक ही भूकंप के अलग अनुभव हो सकते हैं।

नरम जमीन कुछ परिस्थितियों में हिलने का प्रभाव बढ़ा सकती है। जलसंतृप्त ढीली मिट्टी में द्रवीकरण जैसी प्रक्रिया भी समस्या बन सकती है। अपनी जमीन या भवन की सुरक्षा का फैसला सामान्य जानकारी से नहीं, योग्य अभियंता की जाँच से करें।

रिक्टर स्केल, परिमाण और तीव्रता

रिक्टर स्केल ऐतिहासिक रूप से भूकंप का परिमाण मापने की विधि है। आज बड़े भूकंपों के लिए आघूर्ण परिमाण सहित अन्य उपयुक्त पैमाने भी इस्तेमाल होते हैं। इसलिए हर भूकंप की हर संख्या को केवल रिक्टर स्केल कहना तकनीकी रूप से सही नहीं है।

परिमाण घटना के आकार का माप है। तीव्रता किसी स्थान पर महसूस हुए झटकों और प्रभाव का वर्णन करती है। एक भूकंप का परिमाण एक हो सकता है, जबकि अलग जगहों की तीव्रता अलग होगी। संख्या देखकर किसी विशेष घर को सुरक्षित घोषित नहीं किया जा सकता।

शुरुआती परिमाण अधिक जानकारी मिलने पर संशोधित हो सकता है। इसे अपने आप गलत सूचना या छिपाव न समझें। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र जैसी आधिकारिक संस्था के अद्यतन विवरण को देखें। अपुष्ट स्क्रीनशॉट से अधिक विश्वसनीय मूल सूचना होती है।

भूकंप क्यों आता है के संदर्भ में घटना के परिमाण और स्थान के अनुसार तीव्रता का अंतर।
भूकंप का आकार और किसी स्थान पर उसका प्रभाव अलग माप हैं।

भारत के भूकंप ज़ोन क्या बताते हैं?

भारत के मानक भूकंपीय मानचित्र में ज़ोन दो, तीन, चार और पाँच का वर्गीकरण प्रचलित है। बढ़ती श्रेणी अधिक संभावित भूकंपीय खतरे को दर्शाती है। यह मानचित्र भवन निर्माण और जोखिम समझने में मदद करता है; किसी तारीख को भूकंप आने का कार्यक्रम नहीं बताता।

संस्करण संबंधी स्पष्टता: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के एक अप्रैल, दो हजार छब्बीस के संसदीय उत्तर के अनुसार, मार्च में संशोधित क्षेत्रीकरण वापस लिए जाने के बाद वर्ष दो हजार सोलह वाला मानक मानचित्र लागू रहा। इसलिए पुराने और नए प्रस्तावों की तस्वीरें मिलाकर निष्कर्ष न निकालें। निर्माण संबंधी निर्णय में भारतीय मानक ब्यूरो का लागू संस्करण जाँचें।

ज़ोन सामान्य अर्थ
दो तुलनात्मक रूप से कम भूकंपीय खतरा
तीन मध्यम भूकंपीय खतरा
चार उच्च भूकंपीय खतरा
पाँच बहुत उच्च भूकंपीय खतरा

कम खतरे वाला क्षेत्र शून्य खतरे वाला नहीं होता। एक राज्य के अलग हिस्सों का वर्गीकरण भी अलग हो सकता है। अपने शहर की सही स्थिति आधिकारिक मानचित्र से देखें और किसी पुराने रंगीन चित्र को अंतिम प्रमाण न मानें।

क्या भूकंप का सटीक पूर्वानुमान संभव है?

किस समय, किस जगह और कितने परिमाण का भूकंप आएगा, इसकी भरोसेमंद सटीक भविष्यवाणी वर्तमान विज्ञान नहीं कर पाता। लंबे समय के खतरे का आकलन और घटना की निश्चित तारीख बताना अलग बातें हैं। पशुओं के व्यवहार या ग्रहों की स्थिति वाले संदेशों को प्रमाणित चेतावनी न मानें।

जहाँ भूकंप पूर्व चेतावनी व्यवस्था उपलब्ध हो, वह घटना शुरू होने के बाद तरंगों का पता लगाकर कुछ स्थानों को सीमित समय दे सकती है। यह कई दिन पहले की भविष्यवाणी नहीं है। अलर्ट न मिलने की स्थिति में भी महसूस होते झटकों पर तत्काल सुरक्षा व्यवहार जरूरी है।

भूकंप क्यों आता है समझने के बाद घर की तैयारी

घर की सुरक्षा केवल बाहर निकलने का रास्ता याद रखने से पूरी नहीं होती। भारी अलमारियाँ सुरक्षित कराएँ, टूटने वाली वस्तुएँ नीचे रखें और बिस्तर के ऊपर भारी सजावट न लगाएँ। ढीली वस्तुएँ झटकों में चोट का कारण बन सकती हैं।

भूकंप से बचाव के लिए परिवार के साथ सुरक्षित स्थान पहचानें और अभ्यास करें। जरूरी दस्तावेजों की प्रतियाँ, नियमित दवाएँ, पानी, प्राथमिक उपचार सामग्री और टॉर्च सुलभ रखें। प्रत्येक सदस्य को यह पता हो कि झटके रुकने के बाद कहाँ मिलना है और किस संपर्क के माध्यम से सूचना देनी है।

आपदा तैयारी के कुछ सिद्धांत साझा होते हैं, लेकिन कार्रवाई घटना के अनुसार बदलती है। उदाहरण के लिए चक्रवात में निकासी और सुरक्षित आश्रय की तैयारी पहले से मिली चेतावनी पर आधारित हो सकती है। भूकंप के बीच भवन से दौड़कर निकलना उसी तरह की कार्रवाई नहीं है।

भूकंप आने पर क्या करें: भवन के अंदर

नीचे झुकें, ढकें और पकड़ें। घुटनों और हाथों के बल नीचे आएँ ताकि गिरने से बच सकें। पास में मजबूत मेज हो तो उसके नीचे सिर और गर्दन बचाएँ। मेज को पकड़कर झटके रुकने तक रुके रहें। दूर के सुरक्षित स्थान तक भागने की कोशिश न करें।

मेज न हो तो पास के ऐसे स्थान पर सिर और गर्दन ढकें जहाँ खिड़की और गिरती वस्तुओं का खतरा कम हो। बालकनी, शीशे और भारी अलमारी से दूर रहें। झटकों के दौरान सीढ़ियों या लिफ्ट की ओर न दौड़ें। सामान्य दरवाजे की चौखट को सबसे सुरक्षित स्थान मानना भी सही नियम नहीं है।

बिस्तर पर हों तो आम तौर पर वहीं रहकर तकिए से सिर और गर्दन ढकें। पहिए वाली कुर्सी का उपयोग करते हों तो उसके पहिए रोकें और सिर तथा गर्दन की रक्षा करें। व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार अभ्यास पहले तैयार करना बेहतर है।

भूकंप क्यों आता है जानने के साथ झटकों में नीचे झुकने, सिर ढकने और मेज पकड़ने की सुरक्षित मुद्रा।
भवन के अंदर झटकों के दौरान पास की मजबूत आड़ लेकर सिर और गर्दन बचाएँ।

बाहर, वाहन और भीड़ वाली जगह पर बचाव

बाहर हों तो इमारतों, बिजली के तारों, खंभों और गिर सकने वाली चीजों से दूर खुले स्थान पर जाएँ। वहाँ जमीन के पास रहकर सिर बचाएँ। इमारत की बाहरी दीवार के पास खड़े रहना सुरक्षित खुले स्थान के समान नहीं है।

वाहन में हों तो पुल, ऊपरी सड़क, तार और पेड़ों से दूर सुरक्षित जगह रुकें। यातायात का ध्यान रखें और वाहन में रहें। झटके रुकने के बाद क्षतिग्रस्त रास्तों पर सावधानी जरूरी है। अचानक रुककर दूसरों के लिए अतिरिक्त दुर्घटना जोखिम न बनाएँ।

विद्यालय या सभा स्थल में धक्का-मुक्की से बचें। बच्चों को किसी अनजान दिशा में दौड़ाने के बजाय अभ्यास की गई कार्रवाई कराएँ। जिम्मेदार व्यक्ति समूह की गिनती और सहायता की जरूरत देखें। निकासी झटके रुकने के बाद सुरक्षित मार्ग और स्थानीय निर्देश के अनुसार करें।

झटके रुकने के बाद क्या करें?

बाद के झटके आ सकते हैं। फिर से हिलना महसूस हो तो वही सुरक्षा व्यवहार अपनाएँ। क्षतिग्रस्त भवन से सुरक्षित रास्ते निकलें और अधिकारियों की अनुमति के बिना वापस न जाएँ। दीवारों की दरारों को देखकर स्वयं संरचनात्मक सुरक्षा का प्रमाणपत्र न दें।

गैस की गंध या रिसाव का संदेह हो तो माचिस न जलाएँ और बिजली के स्विच न चलाएँ। सुरक्षित रूप से दूर जाएँ और संबंधित आपात सेवा को सूचना दें। प्रशिक्षण के बिना जोखिमपूर्ण मरम्मत या मलबे में प्रवेश न करें। सहायता करते समय अपनी सुरक्षा भी जरूरी है।

समुद्री तट पर तेज या लंबे झटके महसूस हों तो सुनामी की संभावना के लिए स्थानीय निकासी व्यवस्था अपनाएँ और ऊँचे सुरक्षित क्षेत्र की ओर जाएँ। सुनामी और चक्रवात की समुद्री लहरें अलग प्रक्रियाएँ हैं। चक्रवाती तूफानी ज्वार का अर्थ जानना इस भ्रम को दूर करता है।

भूकंप क्यों आता है: परिवार में समझ और अभ्यास

तैयारी की बैठक केवल निर्देश सुनाने तक सीमित न रखें। परिवार के हर सदस्य से पूछें कि उसके कमरे में कौन-सी वस्तु गिर सकती है और निकटतम सुरक्षित आड़ कहाँ है। बच्चे, बुजुर्ग और चलने में कठिनाई वाले व्यक्ति अपनी जरूरत बताएँ। अभ्यास में किसी को जमीन पर आने के लिए मजबूर न करें; उसकी क्षमता के अनुसार सिर और गर्दन बचाने की योजना बनाएँ।

भूकंप क्यों आता है समझाने के बाद अभ्यास का उद्देश्य डर बढ़ाना नहीं, प्रतिक्रिया सरल बनाना है। तय करें कि फोन न चलने पर कहाँ मिलेंगे और विद्यालय से बच्चों की जानकारी कैसे मिलेगी। आपदा के समय अलग-अलग लोग एक ही दिशा में खोजने न निकल पड़ें। पहले से तय जिम्मेदारियाँ भ्रम और अनावश्यक आवाजाही घटा सकती हैं।

अलग आपदाओं के कारण अलग पहचानें

भूकंप मुख्यतः भूगर्भीय प्रक्रिया है। इसे सामान्य रूप से गर्म मौसम या बारिश का परिणाम बताना सही नहीं है। दूसरी ओर गर्मी, वर्षा और समुद्री जोखिम समझने के लिए जलवायु परिवर्तन के वास्तविक कारण पढ़ना उपयोगी है। दोनों में तैयारी जरूरी है, लेकिन मूल कारण एक नहीं हैं।

सूचना साझा करने से पहले स्रोत, समय और संबंधित क्षेत्र देखें। पुरानी घटना का वीडियो नई घटना बताकर भेजना भ्रम पैदा कर सकता है। परिवार के समूह में आधिकारिक सूचना भेजें और बिना जाँच भविष्यवाणी आगे न बढ़ाएँ।

घटना के बाद छोटे संदेश में अपनी स्थिति और जरूरत बताएँ। अनावश्यक बार-बार फोन करने के बजाय उपलब्ध संचार माध्यम का विवेकपूर्ण उपयोग करें। बच्चे किसी जिम्मेदार परिचित के साथ रहें और मिलने की तय जगह याद रखें। परिवार की योजना में आपसी संपर्क के साथ पड़ोस में सहायता की जरूरत भी पहचानें।

भूकंप क्यों आता है समझने के बाद घर की सुरक्षित वस्तुओं और जरूरी आपदा सामग्री की तैयारी।
सुरक्षित रखी वस्तुएँ और पहले से अभ्यास की गई योजना जोखिम घटाने में मदद करती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

१. भूकंप क्यों आता है, मुख्य कारण क्या है?

अधिकतर भूकंप चट्टानों में जमा तनाव के अचानक खिसकाव से मुक्त होने पर आते हैं। प्लेटों की गति और भ्रंश इसका प्रमुख संदर्भ हैं। ऊर्जा तरंगों के रूप में फैलकर जमीन हिलाती है।

२. क्या झटकों के दौरान बाहर भागना चाहिए?

भवन के अंदर हों तो आम तौर पर वहीं सुरक्षित आड़ लेकर सिर और गर्दन बचाएँ। दौड़ते समय गिरती वस्तुओं और भीड़ से चोट लग सकती है। झटके रुकने पर परिस्थिति और स्थानीय निर्देश देखकर सुरक्षित निकासी करें।

३. क्या लिफ्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं?

भूकंप के दौरान और उसके तुरंत बाद निकासी के लिए लिफ्ट का उपयोग न करें। बिजली या यांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। झटके रुकने पर सुरक्षित निकास का उपयोग करें और क्षतिग्रस्त रास्ते से बचें।

४. क्या छोटा भूकंप बड़े भूकंप को रोक देता है?

ऐसा भरोसा नहीं किया जा सकता। छोटे झटकों को भविष्य के बड़े भूकंप से सुरक्षा का प्रमाण न मानें। जोखिम घटाने के भरोसेमंद रास्ते सुरक्षित निर्माण, वस्तुओं को सुरक्षित करना और अभ्यास हैं।

५. क्या कम खतरे वाले ज़ोन में तैयारी जरूरी है?

हाँ। ज़ोन तुलनात्मक खतरा दर्शाता है, पूर्ण सुरक्षा नहीं। भवन की गुणवत्ता, स्थानीय जमीन और घरेलू वस्तुओं का जोखिम भी मायने रखता है। बुनियादी तैयारी हर परिवार और संस्था के लिए उपयोगी है।

निष्कर्ष

भूकंप क्यों आता है, इसका मुख्य उत्तर पृथ्वी की प्लेटों, भ्रंशों और जमा तनाव में है। सुरक्षा का आधार अफवाह नहीं, सुरक्षित निर्माण और अभ्यास है। झटकों में नीचे झुकें, सिर और गर्दन ढकें तथा मजबूत आड़ पकड़ें। घटना के बाद क्षतिग्रस्त भवनों से दूर रहें और आधिकारिक निर्देश अपनाएँ।