सुबह जल्दी उठने का फैसला करना आसान है। मुश्किल तब आती है जब रात का काम देर तक चलता है, फोन हाथ से नहीं छूटता और सुबह फिर वही भागदौड़ होती है। सेहत की अच्छी आदतें अक्सर जानकारी की कमी से नहीं, दिनचर्या में जगह न मिलने से छूटती हैं। इसलिए शुरुआत किसी आदर्श व्यक्ति का पूरा रूटीन अपनाने से नहीं, अपने दिन को ध्यान से देखने से करें।
एक कागज पर सुबह से रात तक की दिनचर्या लिखें। कहां आप बहुत देर तक बैठे रहते हैं, कब भोजन टलता है और किस समय बिना जरूरत स्क्रीन खुल जाती है? यही आपके छोटे बदलाव की जगहें हैं। इस लेख के उदाहरण रोजमर्रा की योजना बनाने के लिए हैं। इन्हें किसी बीमारी के इलाज, तय वजन घटाने के वादे या सबके लिए एक जैसे स्वास्थ्य नियम की तरह न पढ़ें।
एक साथ सब बदलने से पहले एक समस्या चुनें
यदि आज ही जल्दी सोना, रोज व्यायाम, नया नाश्ता, ध्यान और फोन की सीमा शुरू करेंगे तो हर बदलाव दूसरे के साथ समय मांगेगा। बेहतर है कि पहले वह परेशानी चुनें जिसका रोज सबसे ज्यादा सामना होता है। उदाहरण के लिए, यदि सुबह खाना तैयार नहीं होता तो रात को उसकी छोटी तैयारी करना एक स्पष्ट काम है। ‘पूरी जिंदगी सुधारनी है’ की तुलना में यह पूरा करना आसान होगा।
चुना हुआ काम इतना साफ होना चाहिए कि दिन के अंत में बता सकें कि हुआ या नहीं। ‘आज अच्छी आदतें रखीं’ अस्पष्ट है। ‘कल के नाश्ते की सामग्री रख दी’ स्पष्ट है। शुरुआत के लिए एक सप्ताह देखें कि यह काम आपकी दिनचर्या में बैठता है या नहीं। नहीं बैठता तो खुद को आलसी कहने से पहले समय और व्यवस्था बदलकर देखें।
नींद के लिए केवल अलार्म नहीं, शाम की तैयारी
CDC के अनुसार 18 से 60 वर्ष के वयस्कों को आम तौर पर कम से कम सात घंटे नींद की जरूरत होती है; उम्र के दूसरे समूहों के लिए सुझाव अलग हैं। अच्छी नींद में अवधि के साथ गुणवत्ता भी मायने रखती है। रोज लगभग समान समय पर सोना उठना और सोने से पहले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बंद करना मददगार आदतों में शामिल हैं। [1]
इसे लागू करने के लिए अपनी वास्तविक सुबह से पीछे की ओर सोचें। यदि आपको सात बजे उठना है, तो देर रात तक चलने वाले कौन से काम पहले हो सकते हैं? कपड़े चुनना, बैग तैयार करना या अगले दिन की सूची लिखना शाम में किया जा सकता है। सोने की तैयारी शुरू होने का एक समय रखें। बिस्तर में पहुंचने के बाद अगले दिन की सारी व्यवस्था करने लगेंगे तो समय फिर खिसकेगा।
फोन की जगह बदलकर देखिए
कई बार स्क्रीन टाइम कम करने का फैसला फोन हाथ में रहते हुए किया जाता है। एक आसान प्रयोग है कि पढ़ाई, भोजन या सोने की तैयारी के दौरान फोन की तय जगह अलग रखें। जरूरी कॉल सुनाई देने की व्यवस्था कर सकते हैं, लेकिन स्क्रीन हर कुछ मिनट में देखने की जरूरत न पड़े। परिवार या काम की जिम्मेदारी हो तो उसी के अनुसार अपवाद तय करें।
उदाहरण के लिए रात को चार्जर बिस्तर से कुछ दूर रख सकते हैं। सुबह अलार्म बंद करने के बाद सीधे संदेशों में जाने के बजाय पहले जरूरी सुबह का काम करें। यह सबके लिए सफल होने का वैज्ञानिक वादा नहीं, वातावरण बदलने का व्यावहारिक सुझाव है। एक सप्ताह बाद देखें कि स्क्रीन खुलने की संख्या कम हुई या आपको दूसरे तरीके की जरूरत है।
दिन में गतिविधि के छोटे मौके खोजें
WHO शारीरिक गतिविधि को केवल जिम तक सीमित नहीं मानता। चलना, साइकिल चलाना, खेल और रोज के कई काम भी इसमें आते हैं। लंबे समय तक बैठे रहने की आदत के बीच गतिविधि बढ़ाना उपयोगी दिशा है। [2] इसका मतलब यह नहीं कि कुछ कदम चल लेने से हर स्वास्थ्य जोखिम खत्म हो जाएगा। छोटे मौके कुल दिनचर्या का हिस्सा हैं।
अपने दिन के ऐसे काम पहचानें जिनमें सहज हलचल जोड़ी जा सके। फोन पर छोटी बातचीत खड़े होकर करना, पानी लेने जाना या सुरक्षित जगह पर थोड़ी वॉक कुछ विकल्प हैं। हर व्यक्ति की कार्यस्थल की स्थिति अलग होगी। वाहन चलाते समय, मशीन पर काम करते हुए या असुरक्षित जगह पर केवल लक्ष्य पूरा करने के लिए गतिविधि न जोड़ें। सुविधा और सुरक्षा पहले आएंगी।
भोजन की व्यवस्था भूख लगने से पहले
यदि रोज दोपहर को तय करना पड़ता है कि क्या खाएं, तो सबसे जल्दी मिलने वाली चीज ही अक्सर चुनी जाती है। सप्ताह की शुरुआत में दो या तीन आसान भोजन विकल्प लिख लेना निर्णय कम कर सकता है। यह जटिल डाइट चार्ट नहीं होना चाहिए। घर में जो सामग्री और समय उपलब्ध है, उसी के आधार पर योजना बनाएं।
मसलन, एक दिन बची हुई सुरक्षित रखी दाल के साथ रोटी, दूसरे दिन सब्जी और दही, और किसी व्यस्त दिन के लिए आसानी से तैयार होने वाला विकल्प तय हो सकता है। भोजन का सुरक्षित भंडारण और दोबारा गरम करना भी ध्यान में रखें। घर में सबकी पसंद अलग हो तो पूरा अलग मेन्यू बनाने के बजाय साझा आधार चुनें। जरूरत के अनुसार अलग हिस्से या साथ की चीजें जोड़ी जा सकती हैं।
पानी याद रखने के लिए साधारण व्यवस्था
डेस्क पर पानी उपलब्ध रखना या बाहर जाते समय बोतल की जांच करना एक छोटा व्यावहारिक काम है। हर व्यक्ति के लिए इंटरनेट पर बताई गई एक ही मात्रा सही नहीं होती। गर्मी, गतिविधि, भोजन और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार जरूरत बदल सकती है। डॉक्टर ने तरल पदार्थ के बारे में खास निर्देश दिए हों तो वही मानें।
आदत बनाने का उद्देश्य बार बार खुद को जबरन बड़ी मात्रा पिलाना नहीं है। बस यह देखें कि आप उपलब्धता की कमी या काम में खो जाने के कारण पानी को लगातार टालते तो नहीं। यदि बोतल साथ रखते हैं, तो उसे साफ रखने और दोबारा भरने का समय भी तय करें। साफ बोतल तैयार रखना, सिर्फ नई बोतल खरीदने से अधिक उपयोगी व्यवस्था है।
आराम को भी दिनचर्या में जगह दें
दिन का हर खाली मिनट उत्पादक बनाने की कोशिश में भोजन, बातचीत और सामान्य आराम पीछे छूट सकते हैं। अपने कार्यक्रम में ऐसे छोटे हिस्से रखें जहां कोई लक्ष्य पूरा न करना हो। यह छत पर बैठना, पसंद का संगीत सुनना या घर के किसी व्यक्ति से बात करना हो सकता है। जो चीज आपको सहज लगे, वही चुनें; आराम भी प्रतियोगिता नहीं है।
यदि काम और घर दोनों की जिम्मेदारी है, तो परिवार के साथ काम बांटने पर बात करें। ‘मुझे समय चाहिए’ के साथ कोई स्पष्ट व्यवस्था रखें, जैसे रात के बर्तन या अगले दिन की तैयारी में मदद। स्वास्थ्य की जिम्मेदारी को केवल व्यक्तिगत इच्छाशक्ति की कहानी बना देने से असली बाधाएं छिप जाती हैं। समय, पैसे और सहयोग की सीमाओं को योजना में शामिल करना जरूरी है।
आदत को पहले से होने वाले काम से जोड़ें
नई चीज याद रखने के लिए अलग अलार्म लगाने के बजाय किसी स्थिर काम के बाद उसे रख सकते हैं। जैसे नाश्ते के बर्तन रखने के बाद अगले भोजन की सामग्री देखना, या काम खत्म करके कुर्सी से उठते समय थोड़ी सहज गतिविधि करना। संबंध जितना स्पष्ट होगा, रोज फैसला उतना कम लेना पड़ेगा।
यह भी जांचें कि चुना हुआ पुराना काम वास्तव में नियमित होता है या नहीं। यदि आपकी ड्यूटी बदलती रहती है तो घड़ी के समय की जगह घटना उपयोगी हो सकती है, जैसे ‘घर लौटकर कपड़े बदलने के बाद’। NIDDK की आदत बदलने की गाइड छोटे लक्ष्य, बाधाओं की तैयारी और प्रगति लिखने को महत्व देती है। [3] अपने उदाहरण उसी ढांचे में बनाएं, किसी और का पूरा कार्यक्रम न उठाएं।
सात दिन की छोटी समीक्षा कैसे करें
पहले दिन केवल एक आदत चुनें। अगले दो दिन देखें कि उसे रोकने वाली चीज क्या है। चौथे दिन जरूरत हो तो समय या मात्रा बदलें। पांचवें और छठे दिन उसी आसान रूप को दोहराएं। सातवें दिन पांच मिनट की समीक्षा करें। यह सात दिन में आदत पक्की होने का दावा नहीं, अपने तरीके को परखने का एक शुरुआती प्रयोग है।
समीक्षा में तीन बातें लिखें: क्या किया, कहां अटके और अगली बार क्या छोटा बदलाव करेंगे। अगर केवल दो दिन काम हुआ तो वे दो दिन भी जानकारी देते हैं। संभव है जिस समय को आपने चुना वह व्यस्त रहता हो। अगला लक्ष्य सात में सात अंक लाना नहीं, पिछले अनुभव से बेहतर व्यवस्था बनाना है।
तुलना और पूर्णता की मांग से बचें
सोशल मीडिया पर दिखने वाला सुबह का रूटीन अक्सर किसी दिन का चुना हुआ हिस्सा होता है। उसमें घर की मदद, काम का समय या तैयारी दिखाई नहीं देती। इसलिए किसी की पांच बजे की सुबह को अपनी सफलता का मापदंड न बनाएं। रात की ड्यूटी करने वाले व्यक्ति के लिए अच्छी दिनचर्या की घड़ी अलग होगी।
इसी तरह एक दिन बाहर का खाना खा लेने या देर से सो जाने को पूरे सप्ताह की हार न मानें। अगले सामान्य अवसर पर लौटना ज्यादा उपयोगी है। छूटी हुई नींद, भोजन या गतिविधि की भरपाई दंड की तरह करने के बजाय कारण समझें। अगर कार्यक्रम बहुत कठोर है तो उसे ढीला करना असफलता नहीं, वास्तविक जीवन के अनुसार सुधार है।
कब केवल आदत बदलना पर्याप्त नहीं
लगातार थकान, लंबे समय से नींद की समस्या, जोरदार खर्राटों के साथ सांस रुकना, असामान्य वजन बदलाव या कामकाज पर असर डालने वाली मनोदशा को सिर्फ आलस न मानें। ऐसे लक्षणों के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है। अच्छी दिनचर्या उपचार का साथ दे सकती है, लेकिन जांच या निर्धारित दवा की जगह नहीं लेती।
आज की शुरुआत के लिए अपनी सबसे छोटी रुकावट चुनें। रात को बैग तैयार करना है, पानी की बोतल साफ रखनी है या भोजन का एक विकल्प तय करना है? एक काम लिखें और उसके लिए जगह बनाएं। स्वस्थ दिनचर्या अक्सर ऐसे ही साधारण फैसलों से आकार लेती है। उसे टिकाऊ बनाने के लिए अपने समय, शरीर और जिम्मेदारियों को साथ लेकर चलना होगा।
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