GCC आख़िर होता क्या है?

GCC यानी Global Capability Centre — किसी विदेशी कंपनी का वह ऑफिस जो सिर्फ ग्राहकों की कॉल संभालने के लिए नहीं, बल्कि कंपनी की अपनी टेक्नोलॉजी, डेटा और इनोवेशन से जुड़ा मुख्य काम करने के लिए बनाया जाता है। यानी यह पारंपरिक BPO से अलग, कंपनी की 'अपनी टीम' की तरह काम करता है।

चेन्नई क्यों बन रहा है नया हब?

अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज, स्किल्ड टैलेंट, बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और अपेक्षाकृत कम लागत — इन्हीं वजहों से चेन्नई जैसे शहर बड़ी कंपनियों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। इसके अलावा कई कंपनियां पहले से यहां मौजूद हैं, जिससे नए निवेश के लिए माहौल और आसान हो जाता है।

इस तरह की नौकरियों में क्या काम मिलता है?

आमतौर पर ऐसे सेंटर में IT और क्लाउड सर्विसेज़, डेटा एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे रोल्स शामिल होते हैं। यानी सिर्फ टेक्निकल डिग्री ही नहीं, प्रॉब्लम-सॉल्विंग और डेटा से जुड़ी समझ रखने वालों के लिए भी मौके खुलते हैं।

भारत के लिए इसका बड़ा मतलब क्या है?

यह ट्रेंड दिखाता है कि भारत अब सिर्फ सस्ती आउटसोर्सिंग डेस्टिनेशन नहीं रह गया, बल्कि दुनिया की बड़ी कंपनियों के लिए इनोवेशन और तकनीकी विकास का केंद्र बनता जा रहा है। इससे लंबे समय में स्किल्ड नौकरियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जाती है।

नौकरी खोजने वालों के लिए सलाह

अगर आप ऐसे रोल्स के लिए तैयारी कर रहे हैं, तो क्लाउड प्लेटफॉर्म, डेटा टूल्स और बेसिक कोडिंग स्किल्स पर फोकस करना फायदेमंद रहता है। साथ ही कंपनी की आधिकारिक करियर वेबसाइट से जुड़ी जानकारी ही सबसे भरोसेमंद मानी जानी चाहिए।